मङ्गलम्

 श्रीगणेशाय नमः।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।


श्रीसरस्वत्यै नमः।

नमामि शारदां देवीं वीणापुस्तकधारिणीम्।
विद्यारम्भं करिष्यामि प्रसन्ना भव सर्वदा।।


श्रीगुरुभ्यो नमः।

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।।

टिप्पणियाँ